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खुद को IAS बताकर महिला डॉक्टर को प्रेमजाल में फंसाया, 3 लाख रुपये ठग लिया; वाराणसी से फर्जी SDM गिरफ्तार

 Written By: Mangal Yadav
 Published : Aug 14, 2026 11:01 am IST,  Updated : Aug 14, 2026 11:16 am IST

पुलिस ने एक फर्जी आईएएस अधिकारी को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को मध्य प्रदेश के धार में एसडीएम बताता था और महिलाओं को प्रेम जाल में फंसाता था।

आरोपी की फाइल फोटो- India TV Hindi
आरोपी की फाइल फोटो Image Source : REPORTER

नरसिंहपुरः फर्जी आईएएस बनकर महिला चिकित्सक से धोखाधडी करने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जीवनसाथी डॉट कॉम के माध्यम से महिला चिकित्सक से संपर्क कर स्वयं को चिकित्सक एवं आईएएस अधिकारी बताया। एमबीबीएस, एमडी, डीएम और यूपीएससी चयनित होकर मध्यप्रदेश कैडर मिलने का झूठा दावा किया। 

वाराणसी से गिरफ्तार हुआ आरोपी

आरोपी ने जिला धार में एसडीएम पद पर पदस्थ होने एवं वरिष्ठ अधिकारियों से संबंध होने की बात कहकर विश्वास में लिया। सहायता करने का झांसा देकर लगभग 3 लाख रुपये की धोखाधड़ी की। तकनीकी साक्ष्यों एवं पतासाजी के आधार पर वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में दबिश देकर आरोपी को गिरफ्तार किया गया। 

आरोपी अपने गांव एवं परिजनों को भी स्वयं को आईएएस अधिकारी बताकर भ्रमित करता था। एआई आधारित तकनीक से फोटो एडिट कर स्वयं को उच्च पदस्थ अधिकारी के रूप में प्रस्तुत करता था। वरिष्ठ अधिकारियों एवं प्रशासनिक संस्थानों की फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड कर लोगों का विश्वास जीतता था। 

बिहार से भी फर्जी आईएएस हुआ था गिरफ्तार

बता दें कि इससे पहले भी फर्जी आईएएस के मामले सामने आ चुके हैं। अभी हाल में ही बिहार के खगड़िया में पुलिस वे एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ़्तार किया था जो IAS अफ़सर बनकर घूमता था। वह खुद को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का अंडरकवर एजेंट बताता था और 'भारत सरकार' का बोर्ड लगी टेस्ला कार में पूरे बिहार में घूमता था। आरोपी की पहचान मनीष गुप्ता के तौर पर हुई।

पुलिस को मिली गुप्त सूचना के आधार पर उसे जमालपुर में उसके घर से गिरफ़्तार किया गया, जो गोगरी पुलिस स्टेशन इलाके में आता है। उसके घर की तलाशी लेने पर 'फ़ुल सेल्फ़-ड्राइविंग' फ़ीचर वाली टेस्ला कार, टाटा सफ़ारी, विदेशी शराब, कई मोबाइल फ़ोन, बैंक कार्ड और दूसरी कीमती चीज़ें ज़ब्त की गईं। पुलिस के मुताबिक, गुप्ता ने अपने कथित सरकारी संपर्कों के आधार पर अपनी एक बड़ी पहचान बनाई थी। बताया जाता है कि वह खुद को IAS अफ़सर बताता था और सेंट्रल विजिलेंस कमीशन से भी संबंध होने का दावा करता था। पुलिस ने बताया कि उसके घर से जो पहचान पत्र मिला, जिसमें उसे IAS अफ़सर बताया गया था, वह शुरुआती जांच-पड़ताल में फ़र्ज़ी पाया गया।

रिपोर्ट- आलोक सिंह

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